Category - भक्ति कथाए

कृष्ण नाम और बालक

एक बार की बात है। एक दिन एक बालक को खीर खाने की इच्छा हुई। तभी वहा से एक  दुध वाली गुजर रही थी। तो बालक से बोली- क्या तुम्हे  भी दुध चहिये?

बालक बोला- हाँ  पर मेरे पास मूल्य चुकाने के लिये पैसे नही है, वो बोली जा भीतर  से एक बर्तन ले आ आज मै तुझे मुफ्त मे दुध दूंगी l

बालक तीव्रता से एक  पतीलि ले आया, दुध वाली ने उसे  दुध दे दिया और बोली पी जा  जल्दि से, बालक ने एक  हि सास मे सारा दुध पी लिया और धन्यवाद दिया; अगले दिन सुबह से हि वो दूधवाली का रास्ता ताकने लगा ; बहुत देर बाद वो आई, और फिर से दुध दे गई; बालक बहुत प्रसन्न हो गया. एैसा कुछ दिन और चला फिर एक  दिन वो नही आई।

बालक इन्तजार करता राहा पर वो नहि आई। बलाक उदास हो गया और रात भर उसी के बरे मे सोचता रहा  फिर  अगले दिन वो आई।

बालक ने पुछा- तुम कल क्यो नहि आई, मै सारा दिन इन्तजार करता रहा। उसने बाताया कि उसकि तबियत खाराब थी; फिर बोली जा जल्दि से बर्तन ले आ और दुध पी ले। उसने कहा मेरl  खीर खाने का मन करता है; क्या तुम मुझे कुछ ज्यादा दुध दे सकती हो?

दुध वाली बोली ठीक  है जाओ कोइ बड़ा बर्तन ले आओ; और बड़े बर्तन को दुध से भर दिया बालक खुश हो गया, उसने पुछा तुम्हारा नाम क्या है? देखो न जब तुम कल नहीं  आई तो मै किसी  से पुछ भी नही पा रहा था कि तुम क्यो नही आई ; सब कहते  कौनसी  दुध वाली? और मै नाम न बता पl  रहा था!

वो बोली मेर नाम है कृष्णा केशरवानी , मै पास के गॉव मे रह्ती हु, मै यहाँ  नई आइ हु इस लिये बहुत कम लोग मुझे  जानते है; उसके बाद वो चली गई।

अब बालक खीर बनाने का सामान जुटाने मे लग गया। वो इक अनाथ बलाक था उसके माता-पिता के देहान्त के बाद अब वो अकेला ही अपने घर मे रहता  था; उसने सोच अगर दुध को एैसे हि छोड़ के चीनी और चावल लेने गया तो कुत्ता बिल्लि इसे चट कर जायेन्गे इसलिए  इसे धिमि आंच  पर गैस पर रख देता हु जब तक वापिस आउन्गा तब तक दुध भी गरम हो जायेगा फिर तब  चीनी और चावल भी मिला दूंगा । 

तो वह दुध गैस पर रख कर दुकान को गया ;  दुकान पर  भारी भीड़ थी जब समान लेकर लौटा तो देखा सारा दुध पतिलि कि तलि मे चिपक गयl  है और जल भुनकर खाक हो चुका है; अब क्या आज तो खीर के चक्कर मे दुध भी गवा दिया।

जैसे तैसे दिन कटा और फिर अगले दिन दुध वाली का इन्तजार शुरु हुआ जब वो नही आई तो पास पड़ौस मे पुछ्ताछ की- चाचा आपने उस दुध वाली को देखा क्या? चाचा बोले – कौनसी दुध वाली? नाम क्या है उसका? बलाक बोला- वो कृष्णा के के …. !!! वो क्रिश्न आप जानते है न उसे? चाचा- नही मै किसी क्रिश्न नाम कि दुध वाली को नही जानता. बलाक ने दुसरे आदमी से पुछा सब केहेते पुरा नाम क्या है? पर वो बता ना पाता, आखिरकार एक मिला जो शायद उसे जनता था तो उसने  कहा- हाँ  दो दिन बाद आयेगी बाहर गॉव गई है…….

अब बालक ने सोचा मै उसका पुरा नाम तो भुल हि गया हु,अब जो कुछ  याद है कहि उतना भी ना भुल जाउ; तो वो बार बार उसका नाम याद करने लगा- कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा ….. कृष्णा कृष्णा दिन-रात सोते-जगते बस कृष्णा कृष्णा कृष्णा.. कहता  जाता नाम का  ऐसा  प्रभाव हुआ की अब तो कृष्णा बोले बगेर उसे चैन ही ना आये ना भुख लगे न प्यास बस कृष्णा कृष्णा कृष्णा कहता जाये l

कुच दिनो बाद दुध वाली आई, बोली बेटा दुध ले ले, बालक बस कृष्णा कृष्णा कहता  जाये, उसने पुछा क्या हुआ है तुमको ? क्या खीर नही बनानी? बलाक – नही अब खीर नही बनानी, तेरे नाम मे कुछ जादु है अम्मा; कृष्णा कृष्णा… . जपने से बड़ा अनन्द और शान्ति मिल रही है कृष्णा कृष्णा… थिक है खीर नहि खानी तो दुध हि पी ले. बालक- हाँ  थोड़ा सा उस गिलास मे रख दो जब भुख लगेगि तो पी लूँगा  अब तुम जाओ मुझे जप करना है, मुझे उस कृष्णा को ढुढना है जाने कहाँ  छुपा हुआ है. … कृष्णा कृष्णा कृष्णा …..

भगवान के नाम की ये गाथा जाने कितनि सच है पर कथा का सार सत् प्रतिशत सत्य है. और यहि वेदो और पुरानो का भी सार है. जब अप्रत्यक्ष रूप से  “नारlयन नारlयन नारlयन …” जपने से अजामिल कि सदगति हुइ तो फिर इस कथा मे बलाक पर हुये हरि नाम जाप के प्रभाव पर सन्शय क्यो करे?

श्रीमद भगवतम के बलाक ध्रुव कि कथा और इस बलाक कि कथा मे काफी समानाता है हरि नाम कि गाथॉ जितनी गई जाये उतनी कम है l इसलिए  हरे कृष्ण हरे कृष्ण , कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम , राम राम हरे हरे || का जप करके देखिये और मेह्सुस किजिये और फिर भक्तो की   तरह हरि नाम के गुणगान  मे लग जाइये .

जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद की जय ……………………………………………………… हरे कृष्ण l